१-कहना क्या
कैसे ना बहकाये
डर नहीं है
२-कविता पढ़े
गीत बना उसका
मीठी धुन में
३- उसे चाहिए
मेरे प्रेम की चाह
किसी के लिए
४-कोई ना जाने
मेरे मन की बात
यही है ख़ास
५-तेरी मुझसे
बात छुपी नहीं है
यही विशेष
आशा सक्सेना
१-कहना क्या
कैसे ना बहकाये
डर नहीं है
२-कविता पढ़े
गीत बना उसका
मीठी धुन में
३- उसे चाहिए
मेरे प्रेम की चाह
किसी के लिए
४-कोई ना जाने
मेरे मन की बात
यही है ख़ास
५-तेरी मुझसे
बात छुपी नहीं है
यही विशेष
आशा सक्सेना
तूम सपनों में जीने वाली
थोड़ी भी खुशी मिलेयदि
पूर्ण रूप से उसे समेटने वाली
हो बहुत भाग्य शाली |
सब कुछ पाया तुमने
हुई कृपा ईश्वर की तुम पर
सारी समस्याएं दूर हुई
हालाकि कठिनाई भी कम न आईं |
तुम हो जुझारू मन से मजबूत
कोई भी कार्य कर सकती हो
यदि ठान लो पीछे नहीं हटतीं
यही गुण जीवन में सफल बनाता है |
तुम हो दृढ संकल्प ,मेहनत से नहीं
डरतीं
यही बात तुम्हारी सब को प्रिय लगती
हो मिठभाषिणी ,कर्मठ ,कर्तव्य निष्ठ ,
अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटतीं |
आशा सक्सेना
है ऐसा क्या तुममें
सब तुम पर होते निसार
है क्या विशेष तुम में
अति का करते तुमसे प्यार |
हो तुम आम लड़की जैसी
पर हर कार्य में निपुण
जो देखता तुम्हें
हो जाता तुम पर निसार |
हो आधुनिक युग की नारी
किसी से कम नहीं
सब कार्य कर सकती हो
किसी की नहीं आस |
आशा सक्सेना
कबूतर सामान
नही आराम
२-है मेहनती
किसी से कम नहीं
अलग दिखे
३-संदेश देता
अपनी ही प्रिया को
पत्र दे कर
४-कबूतर है
साथ में कोई नहीं
पत्र वाहक
५-अनुशासन
सीखा रहा किससे
कहाँ जाकर
आशा सक्सेना
है गुजारिश तुम से
तुमने यह सब सीखा
कब कहाँ कैसे किससे
मुझे भी बताओ सिखाओ |
तुमने मुझसे क्यूँ
यह राज छिपाया
क्या मैं इस योग्य नहीं
तुम से कुछ सीख न पाऊँगी |
पहले बताया होता
मैं अपना अभ्यास जारी रखती
तुमको समाज में शर्म न आती
मैं भी उस सुख से वंचित न रहती |
आशा सक्सेना
इघर उधर झांकते ही
सारा
जीवन बीत गया
यूँही
इधर उधर झांकते
कोई हल
नहीं निकला
इन सारी
हरकतों का |
बेमतलब
की तांका झाकी
सब को
रास न आती
मन को जब
रास न आए
जिन्दगी
ही रूठ जाए |
सही राह
मिलते ही
जीवन सही
पटरी पर
जाने के
लिए अपना मन बनाए
जल्दी से
अपने कदम बढाए |
आशा सक्सेना
एक दिन की बात है सुबह बहुत ठण्ड थी |मैंने अपनी बाई से
पूंछा इतनी देर कैसे हुई |वह हंस कर बोली मुझे घर का सारा काम
कर के आना पड़ता है |आज नीद नहीं खुली इसी से देर हुई |उसदिन
मुझे गुस्सा आगया मैंने उससे कहा तुम मुझे जबाब देती हो जब काम
करने आई हो तब समय का ध्यान तो रखना ही पड़ेगा |वह इस बात
से नाराज हो गई |बोली सम्हालो अपना घर मुझे क्या खरीद लिया है
और न जाने क्या बकने लगी और अपना सामान उठा कर चल दी |
उस समय तो मैंने काम कर लिया पर ठण्ड का प्रभाव दिखने लगा
मुझ पर दिखने लगा सरदी ने अपना रंग दिखाया और मैं बीमार पड़ गई|
तब उसका कटु भाषण मेरे कानों में गूंजने लगा क्या हमारी जान नहीं है
हमको सरदी नहीं लगती | उसका मन न था काम पर आने का
पर यह जानते हुए कि मेरी तबियत ठीक नहीं रहती उसने कहा था
क्या कुछ छुट्टीनहीं मिल सकती मैंने उसेचिल्लातेyदिया पर दया नहीं आई उस पर
आशा सक्सेना