अमृत कलश

Saturday, February 3, 2024

आम लड़की से भिन्न हो तुम

 है ऐसा क्या तुममें 

सब तुम पर होते निसार 

है क्या विशेष तुम में 

अति का करते तुमसे प्यार |

हो तुम आम लड़की जैसी 

पर हर कार्य में निपुण 

जो देखता तुम्हें

 हो जाता तुम पर निसार  |

हो आधुनिक युग की नारी 

किसी से कम नहीं 

सब कार्य कर सकती हो 

किसी की  नहीं आस |

आशा सक्सेना 


Friday, February 2, 2024

हाइकू


                                                                       १-उड़ान भरी

 कबूतर सामान 

नही आराम 

२-है मेहनती 

किसी से कम नहीं 

अलग दिखे 

३-संदेश देता 

अपनी ही  प्रिया को 

पत्र दे कर 

४-कबूतर है 

साथ में कोई नहीं 

 पत्र वाहक 

५-अनुशासन 

सीखा रहा  किससे

कहाँ जाकर 


आशा सक्सेना 

है एक गुजारिश

 


है गुजारिश  तुम से

तुमने यह सब सीखा

कब कहाँ कैसे किससे

मुझे भी बताओ सिखाओ |

तुमने मुझसे क्यूँ

 यह राज छिपाया

क्या मैं इस योग्य नहीं

तुम से कुछ सीख न पाऊँगी |

पहले बताया होता

मैं अपना अभ्यास जारी रखती

तुमको समाज में शर्म न आती

मैं भी उस सुख से वंचित न रहती |

आशा सक्सेना 

Wednesday, January 31, 2024

इधर उधर झांकते ही

 

इघर उधर झांकते ही 

सारा जीवन बीत गया

यूँही इधर उधर झांकते

कोई हल नहीं निकला

इन सारी हरकतों का |

बेमतलब की तांका झाकी

सब को रास न  आती

मन को जब रास न आए

जिन्दगी ही रूठ जाए |

सही राह मिलते ही

जीवन सही पटरी पर

जाने के लिए अपना मन बनाए

जल्दी से अपने कदम बढाए |

आशा सक्सेना 

Thursday, January 25, 2024

  

एक दिन की बात है सुबह बहुत ठण्ड थी |मैंने अपनी बाई से

पूंछा इतनी देर कैसे हुई |वह  हंस कर बोली मुझे घर का सारा काम

कर के आना पड़ता है |आज नीद नहीं खुली इसी से देर हुई |उसदिन

मुझे गुस्सा आगया मैंने उससे कहा तुम मुझे जबाब देती हो जब काम

 करने आई हो तब समय का ध्यान तो रखना ही पड़ेगा |वह  इस बात

से नाराज हो गई |बोली सम्हालो अपना घर मुझे क्या खरीद लिया है

और न जाने क्या बकने लगी और अपना सामान उठा कर चल दी |

उस समय तो मैंने काम कर लिया पर ठण्ड का प्रभाव दिखने लगा

मुझ पर दिखने लगा सरदी ने अपना रंग दिखाया और मैं बीमार पड़ गई|

तब  उसका कटु भाषण मेरे कानों में गूंजने लगा क्या हमारी जान नहीं है

हमको सरदी नहीं लगती | उसका मन न था काम पर आने का 

पर यह जानते हुए कि मेरी तबियत ठीक नहीं रहती उसने कहा था 

क्या कुछ छुट्टीनहीं मिल सकती मैंने उसेचिल्लातेyदिया पर दया नहीं आई उस पर 

आशा सक्सेना 


Wednesday, November 8, 2023

रंग ही रंग

१-सारी दुनिया 

रंगा रंग  हुई है 

कितनी प्यारी 

२-रगों की रात 

सज रही है कहीं 

देखो तो ज़रा  

३-रंग ही रंग 

बिखरे यहाँ वहां 

उसने देखा 

 ४- पांच  रंग हैं 

आसमान में सजे 

दो गौण रहे 

५-होली के रंग 

सजाए हैं  थाली में 

कान्हां को रंगा 


आशा सक्सेना 


कितने रंग जीवन में बिखरे

 

कितने रंग जीवन में बिखरे

कहाँ से आए जिन्दगी के रंग

 देखने को मिले इस जहां मे |

कोई रंग कैसा कहाँ  ठहरा

या लहराया जाने कहाँ |

जो रंग मन को भाया

पहले पास नजर आया

जब पास जाना चाहा

और दूर होता गया |

मन को ठेस लगी दूरी देख

पर मन को समझाया

हर वह वस्तु जरूरी नहीं  कि मिले

यदि बिना कष्ट मिल जाएगी

कितना आनंद आएगा यह भी  मालूम नहीं|

यही रंग जीवन में जब  दिखाई देगा

अदभुद नजारा होगा जब

 रंग दिखाई देगा चारो ओर  

लोग जानना चाहेगे यह प्राप्ति कैसे हुई 

बताने का  आनन्द कुछ और ही होगा |

आशा सक्सेना