अमृत कलश

Friday, June 18, 2021

जब भी कोई आयोजन होता है |

 

जब भी कोई आयोजन होता है |तैयारी बहुत जोर शोर से होती है |

यह भी नहीं सोचा जाता कि दिखावे में व्यय कितना हो जाएगा |

बस ध्यान में रहता है तो एक बात कोई कमी नहीं होनी चाहिए |

लोग क्या कहेंगे ?

अपनी जेब की कोई फिक्र नहीं कहीं से भी उधार लेलेंगे | इस प्रकार की मानसिकता यदि हो व्यक्ति कभी भी कर्जे से मुक्त नहीं हो पाता|सदा उदासी बनी रहती कभी भी खुश नहीं रह पाता|पर मेरे ख़याल से तो जितनी चादर हो उतने ही पाँव पसारने चाहिए |लोगों का क्या वे तो खाएंगे भी और कमिया भी गिनाएंगे |मन के संताप से कैसे छुटकारा मिलेगा ?आप अपनी राय से मुझे अवगत कराएं |

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