अमृत कलश

Saturday, December 8, 2012

नया खेल

आओ  ऐसा खेलें खेल 
जिससे  बढे सभी मैं मेल 
रामू तुम रूसी बन जाओ 
पप्पू बन अमरीकी जाओ 
तुम चीनी बन जाओ चुन्नू 
जापानी तुम होगे मुन्नूं
लंका वासी लल्लू होगा
तुम भोला मिश्री बन जाओ 
अकरम पाकिस्तानी आओ 
हम तुम ऐसा खेलें खेल
जिससे बढे सभी मैं मेल 
अब मैं बनूँ हिन्द  का लाल
पंचशील की ले कर ढाल  
आगे  कदम बढ़ाऊंगा 
विश्व शान्ति फैलाऊंगा 
तुम सब भी आगे बढ़ आओ
 सद् भावना ह्रदय मैं लाओ
पुन्य कर्म मैं हाथ बटाओ 
अमर  मित्रता मैं बंध जाओ 
आओ ऐसा खेलें खेल 
जिससे बढे सभी मैं मेल 
हम सब बन कर भाई भाई 
दूर करें सब की कठिनाई 
देश हमारे हरे भरे हों 
अन्न और धन से पूरे हों 
कोई रहे न नंगा भूखा 
कोई रहे न गीला सूखा 
एक सामान सभी सुख पावें
सबसे ऊंचा नाम कमावें 
आओ ऐसा खेलें खेल 
जिससे बढे सभी मैं मेल |






2 comments:

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  2. अपनी तरह की अनूठी कविता है।

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