अमृत कलश

Thursday, September 29, 2011

बापू

बापू तुमने बाग लगाया 
खिले फूल मतवारे थे
इन फूलों ने निज गौरब पर 
तन मन धन सब वारे थे |
बावू  तुमने पंथ दिखाया 
चले देश के लाल सुदूर 
जिन की धमक पैर की सुन कर 
महाकाल भी भागा डर कर |
बापू तुमने जोत जलाई देश प्रेम की 
मतवाले हंसते हंसते जूझे जिससे 
शलभ निराले सत् वाले |
बापू  तुमने बीनबजाई 
मणिधर सोए जाग गए 
सुन फुंकार निराली जिसकी 
बैरी भी सब भाग गए |
बापू  तुमने गीता गई 
फिर अर्जुन से चेते वीर 
हुआ देश आजाद मिटी युग युग की  
माँ के मन की पीर |
आ जाओ ओ बापू फिर से 
भारत  तुम्हे बुलाता है 
नव जीवन संचार करो 

यह मन में आशा जगाता है |
अभी तुम्हारे जैसे त्यागी की 
भारत में है कमी बड़ी 
आओ बापू फिर से जोड़ो 
सत्य त्याग की सुघड़ कड़ी |
आशा 







5 comments:

  1. कल 01/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बापू की पुण्य स्मृति को बहुत ही भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है मम्मी ने इस कविता के माध्यम से ! बहुत ही सुन्दर रचना !

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  3. गांधी जी को श्रद्धा पूर्वक सुमन अर्पित करती रचना

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  4. बापू की पुण्य स्मृति के अवसर पर अत्यंत ही भाव पूर्ण अभिनन्दन पर्स्तुत किया है आपने ....बेहद सुन्दर रचना के बधाईयां !!!

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  5. आप सब का इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है |
    आशा

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